दिन 12 में आपका स्वागत है
आज हम पूछते हैं कि कुछ लोगों के लिए stress दुःख क्यों बन जाता है, जबकि दूसरों के लिए नहीं। एक ही बैठक में धीरे-धीरे पढ़ें, जब सुविधा हो तब विशेषज्ञों के दोनों videos देखें, और दिन के इस सवाल को अपने साथ लेकर चलें।
आज की रूपरेखा
- आरंभ — stress दुःख क्यों बन जाता हैजीवन-यात्रा, और समाधान (भीतरी स्थिरता) से आगे का पुल।
- शिक्षा — मन की समता और दो तीरगीता का समत्वम् और बुद्ध का दूसरा आर्य सत्य।
- दिन का मूल्य — सतिMindfulness: अपनी प्रतिक्रियाओं को, उनमें बह जाने से पहले, देख लेना।
- स्वास्थ्य खंड — मायने stress response को कैसे आकार देते हैंStress और mindset पर Dr Kelly McGonigal और Dr Alia Crum।
- विशेषज्ञों की अंतर्दृष्टि (वैकल्पिक सामग्री)Stress, mindset और मायनों पर दो videos (लगभग 33 मिनट)।
- संकल्पित गतिविधि — stress में मदद करने वाला एक कदम चुननाजागरूकता के साथ चुना गया एक छोटा कदम।
- वैज्ञानिक पक्ष और समापनघटना, कहानी और अनुभव; कपालभाति और body scan।
- पढ़ने के लिए एक शांत जगह, और चिंतन के खाली स्थानों के लिए एक पेन।
- विशेषज्ञों के दो videos (33 मिनट) के लिए phone या computer।
- दिन 12 का meditation audio।
जीवन व्यस्त हो सकता है। अगर ज़रूरी लगे तो 21 दिनों से ज़्यादा समय लें; जल्दबाज़ी की कोई ज़रूरत नहीं है। अगर आप TLM Basic के अगले दिन पर न जा पाएँ, तो जो दिन आपने आखिरी बार पूरा किया था, उसी दिन के मूल्य, संकल्पित गतिविधि और meditation का अभ्यास करते रहें। जब आप तैयार हों, तो programme वहीं से फिर शुरू करें जहाँ आपने छोड़ा था।
Stress दुःख क्यों बन जाता है

आज हम अगला कदम उठाते हैं।
इसका जवाब सिर्फ़ इसमें नहीं है कि हमारे साथ क्या होता है, बल्कि इसमें भी है कि मन उस पर कैसी प्रतिक्रिया करता है। आइए, देखें ऐसा क्यों है।
मन की समता
पंचकोश model हमें स्थूल शरीर से लेकर विचार, भावना और बुद्धि के ज़्यादा सूक्ष्म पहलुओं तक, अपने अनुभव के अलग-अलग पहलुओं को समझने में मदद करता है। पिछले दिनों में, मानसिक साधन की ओर मुड़ने से पहले, हमने स्थूल शरीर और प्राण के कोशों की पड़ताल की। अब हम इसी पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए देखते हैं कि मन जीवन की घटनाओं पर कैसी प्रतिक्रिया करता है और वे प्रतिक्रियाएँ हमारे अनुभव को कैसे आकार देती हैं।
हम अपना भीतरी संतुलन खोए बिना इन अनुभवों का सामना कैसे कर सकते हैं?
भगवद्गीता इसका जवाब एक शब्द में देती है—समत्वम्, मन की समता।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ॥Yogasthaḥ kuru karmāṇi saṅgam tyaktvā Dhanañjaya,
siddhy-asiddhyoḥ samo bhūtvā samatvam yoga ucyate.हे धनंजय, योग में स्थित होकर, आसक्ति छोड़कर और सफलता-असफलता में सम रहकर अपने कर्म करो। मन की यही समता योग कहलाती है।अर्जुन को कृष्ण की सलाह: पूरी तरह कर्म करना, और सफलता हो या असफलता, उसका सामना सम मन से करना।
कृष्ण ऐसे जीवन का वादा नहीं करते जिसमें सफलता और असफलता, लाभ और हानि, तारीफ़ और आलोचना न हों। ये जीवन का हिस्सा हैं। असल बात यह है कि हम किस भीतरी संतुलन के साथ इनका सामना करते हैं।
उसका असर हमारे भीतर आकार लेता है।
बुद्ध की अंतर्दृष्टि
बुद्ध ने यही सत्य दूसरे आर्य सत्य के ज़रिए कहा। दर्द अनिवार्य है। पर जब मन सच्चाई का विरोध करता है, तब दुःख बढ़ता है। हम इस बात से गहरे बँध जाते हैं कि जीवन कैसे चलना चाहिए, लोगों को कैसा व्यवहार करना चाहिए और घटनाओं का नतीजा क्या होना चाहिए। जब सच्चाई इन उम्मीदों से अलग होती है, तो जो हो रहा है, हम उसके खिलाफ़ संघर्ष करने लगते हैं और इस तरह अपना दुःख और बढ़ा लेते हैं।
- “यह नहीं होना चाहिए।”
- “मुझसे यह सहा नहीं जाता।”
सच्चाई के खिलाफ़ संघर्ष अक्सर खुद सच्चाई से ज़्यादा भारी हो जाता है।
भाषा अलग। अंतर्दृष्टि वही।
दो तीर
बुद्ध ने इसे दो तीरों की शिक्षा से समझाया। पहला तीर खुद जीवन है—बीमारी, हानि, असफलता, टकराव, निराशा। इससे कोई नहीं बचता।
दूसरा तीर मन चलाता है—कहानी, कड़वाहट, मन में बात को बार-बार दोहराते रहना, विरोध।
पहला तीर दर्द देता है। दूसरा तीर बेवजह का दुःख पैदा करता है।
आंतरिक शासन तब शुरू होता है जब हम दूसरे तीर को अपने-आप चला देने से पहले पहचान लेते हैं।
सक्रिय अनासक्ति (ENA) का मतलब है दूसरे तीर के ज़रिए बेवजह का दुःख पैदा किए बिना पहले तीर पर समझदारी से respond करना।
दूसरा तीर तब पैदा होता है जब हम जीवन के दिए दर्द पर अपने-आप प्रतिक्रिया करते हैं।
सति — mindfulness — इस प्रतिक्रिया को उठते ही पहचानने में हमारी मदद करती है, इससे पहले कि हम उसमें बह जाएँ।
जागरूकता के उस पल में, जो होता है और हम उस पर कैसे respond करते हैं, इन दोनों के बीच हम एक gap बना लेते हैं। यही gap ज़्यादा समझदारी भरा response संभव बनाता है।
यही व्यवहार में mindfulness है, और आंतरिक शासन का एक व्यावहारिक रूप।
आंतरिक शासन और ENA
आंतरिक शासन
“दबाव में भी ध्यान, भावना और व्यवहार को regulate करने की अनुशासित क्षमता — व्यक्तिगत मूल्यों और संस्था के ethos के साथ alignment में, सोचे हुए लक्ष्य को पूरा करने के लिए।”
सक्रिय अनासक्ति (ENA)
“आप जो भी भूमिका निभाते हैं, उसमें पूरी तरह मौजूद रहने, हर ज़िम्मेदारी में पूरी तरह सक्रिय रहने और हर संबंध में पूरी तरह प्रतिबद्ध रहने की प्रशिक्षित क्षमता—इनमें से किसी एक से भी परिभाषित, संचालित या अस्थिर हुए बिना।”
बुद्ध की दो तीरों वाली शिक्षा आंतरिक शासन का एक व्यावहारिक रूप है। पहला तीर जीवन के घटनाक्रम का प्रतीक है। दूसरा तीर उस दुःख का प्रतीक है जो अपने-आप होने वाली प्रतिक्रिया से पैदा होता है।
सक्रिय अनासक्ति (ENA) का मतलब है विरोध, आसक्ति या मन में बातों को बार-बार दोहराने के ज़रिए बेवजह का दुःख जोड़े बिना सच्चाई से पूरी तरह जुड़े रहना।
इस फ़र्क को पहचान पाने की क्षमता ही व्यवहार में आंतरिक शासन है।
सति
कल हमने समाधान को जाना—वह भीतरी स्थिरता जो विचारों के उठने पर भी हमें स्थिर रहने देती है। आज हम उसी स्थिरता पर आगे बढ़ते हुए यह पहचानना सीखते हैं कि प्रतिक्रिया करने से पहले हमारे भीतर क्या होता है।
बौद्ध परंपरा इस गुण को सति कहती है, जिसका अनुवाद आमतौर पर mindfulness किया जाता है।
Mindfulness वर्तमान पल में जो हो रहा है, उसके प्रति जागरूक रहने की क्षमता है—अपने विचारों, भावनाओं, शारीरिक संवेदनाओं और प्रतिक्रियाओं को, तुरंत उनमें बहे बिना, देख पाने की क्षमता।
सोचें कि जब कोई आपकी आलोचना करता है, तो क्या होता है। झुँझलाहट उठ सकती है। मन एक कहानी गढ़ने लगता है। आपको अपना बचाव करने, पलटवार करने या पीछे हट जाने की इच्छा हो सकती है। अक्सर प्रतिक्रिया इससे पहले ही शुरू हो जाती है कि आप पहचान भी पाएँ कि क्या हो रहा है।
सति हमें इस प्रक्रिया को उसी समय देखने में मदद करती है, जब वह घट रही होती है।
आप झुँझलाहट को पहचानते हैं। आप उसके साथ चल रहे विचारों पर ध्यान देते हैं। आप प्रतिक्रिया करने के impulse के प्रति जागरूक हो जाते हैं। आप जो महसूस करते हैं, उसे दबाने की ज़रूरत नहीं है, और न ही तुरंत उस पर अमल करने की।
आप बस जागरूक हो जाते हैं।
जागरूकता एक ठहराव पैदा करती है। उस ठहराव में चुनाव संभव हो जाता है।
दो तीरों की शिक्षा में mindfulness का यही व्यावहारिक महत्व है। हम शायद पहले तीर को न रोक पाएँ—वह दर्द जो जीवन कभी-कभी हमें देता है। पर अपनी प्रतिक्रियाओं पर ध्यान देकर हम उस अतिरिक्त दुःख को कम कर सकते हैं जो विरोध, rumination और आदतन प्रतिक्रियाओं से पैदा होता है।
TLM में आप पहले से ही इसका अभ्यास करते आ रहे हैं। हर बार जब आप देखते हैं कि आपका ध्यान भटक गया है और धीरे से उसे वापस ले आते हैं, तो आप मन क्या कर रहा है, यह पहचानने और अपने ध्यान को फिर से दिशा देने की क्षमता को train कर रहे होते हैं।
आज का body scan इसी अभ्यास को आगे बढ़ाता है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों में संवेदनाओं को देखते हुए, judge करने, विरोध करने या तुरंत प्रतिक्रिया करने के किसी भी झुकाव पर ध्यान दें। किसी खास अनुभव को ज़बरदस्ती लाने की ज़रूरत नहीं है। जो मौजूद है, जितना हो सके, बस उसे देखें।
आज पूरे दिन, बीच-बीच में रुकें और खुद से चार सवाल पूछें:
- इस समय मेरे मन में कौन-से विचार चल रहे हैं?
- इस समय मुझे क्या महसूस हो रहा है?
- जो हो रहा है, उस पर मेरी प्रतिक्रिया कैसी है?
- क्या मेरी प्रतिक्रिया उस बात से मेल खाती है जो मेरे लिए सचमुच मायने रखती है?
इन सवालों का इस्तेमाल खुद की आलोचना करने के लिए न करें। इनका इस्तेमाल ज़्यादा साफ़ देखने के लिए करें।
Mindfulness का मतलब जीवन से पीछे हट जाना या निष्क्रिय हो जाना नहीं है। इसका मतलब है इतना मौजूद रहना कि हम हर विचार, भावना या impulse के इशारे पर अपने-आप चलने के बजाय सचेत होकर respond कर सकें।
जैसे-जैसे यह क्षमता बढ़ती है, हम अपने ध्यान पर शासन करने, अपनी भावनाओं को regulate करने और अपने मूल्यों के हिसाब से अपने कर्म चुनने में ज़्यादा सक्षम होते जाते हैं।
यही व्यवहार में सति है—और आंतरिक शासन की ओर एक कदम।
मायने stress response को कैसे आकार देते हैं
आज हम एक अलग सवाल पूछते हैं। क्या समस्या खुद stress है, या stress से हमारा रिश्ता भी मायने रखता है?
Dr Kelly McGonigal अपनी talk How to Make Stress Your Friend में समझाती हैं कि शरीर के stress response को किसी चुनौती की तैयारी के रूप में देखने से हमारी प्रतिक्रिया का ढंग किस तरह बदल सकता है। वे stress के एक ऐसे पहलू की ओर भी ध्यान दिलाती हैं जो अक्सर अनदेखा रह जाता है: stress हमें दूसरों तक पहुँचने, सहारा माँगने और जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकता है।
Keller और उनके साथियों की एक study (2012) में पाया गया कि जिन लोगों ने अपना stress ज़्यादा बताया और जो यह भी मानते थे कि stress उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, उनमें समय से पहले मौत का risk बढ़ा हुआ था। यह एक observational study का निष्कर्ष है; यह साबित नहीं करता कि अपनी मान्यताएँ बदलने से स्वास्थ्य सुधरता है, पर यह इशारा करता है कि stress के बारे में हमारी मान्यताएँ मायने रख सकती हैं।
Dr Alia Crum और उनके साथियों (2017) ने प्रयोगों के ज़रिए stress mindsets की study की और पाया कि जब हिस्सा लेने वालों को stress को अपनी क्षमता घटाने वाला नहीं, बल्कि बढ़ाने वाला मानने के लिए प्रोत्साहित किया गया, तो उनके कुछ psychological और hormonal responses में फ़र्क दिखा। ये निष्कर्ष इशारा करते हैं कि mindset stress response के कुछ पहलुओं पर असर डाल सकता है, हालाँकि नतीजे अलग-अलग होते हैं।
परिस्थिति वही रह सकती है, पर हम उसकी व्याख्या कैसे करते हैं और उस पर कैसी प्रतिक्रिया करते हैं, यह अलग हो सकता है।
भाग 2 — सबको एक सूत्र में पिरोना
Keller और उनके साथियों, Dr Kelly McGonigal और Dr Alia Crum की research इस बात पर अलग-अलग तरह से रोशनी डालती है कि हमारी मान्यताएँ और व्याख्याएँ stress से हमारे रिश्ते पर कैसे असर डाल सकती हैं।
Stress जीवन का हिस्सा है। मायने यह भी रखता है कि हम उसे कैसे समझते हैं और उस पर कैसी प्रतिक्रिया करते हैं।
यह हमें फिर आज के मूल्य पर ले आता है: सति — mindfulness। Mindfulness हमें यह देखने में मदद करती है कि क्या हो रहा है, इससे पहले कि डर, विरोध या catastrophising हावी हो जाए।
जागरूकता शायद घटना को न बदल पाए, पर वह यह बदल सकती है कि हम कैसे respond करते हैं।
Stress और दुःख पर प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान
दुःख अक्सर उस दूसरे तीर से शुरू होता है जिसे हम खुद चलाते हैं।
Modern psychology और behavioural science हैरानी की हद तक मिलते-जुलते नतीजे पर पहुँचती हैं। हम जिन घटनाओं से गुज़रते हैं, वे मायने रखती हैं। पर हम उन घटनाओं की व्याख्या कैसे करते हैं, उनसे कैसा नाता रखते हैं और उन पर कैसी प्रतिक्रिया करते हैं, यह भी अक्सर उतना ही मायने रखता है।
आगे दी गई विशेषज्ञों की अंतर्दृष्टियाँ इस बात की पड़ताल करती हैं कि stress हमारे जीवन पर जिस तरह असर डालता है, उसे हमारा mindset, हमारी व्याख्या और प्रतिक्रिया कैसे प्रभावित कर सकते हैं।
देखते हुए notes
How to Make Stress Your Friend
Kelly McGonigal एक आम सोच को चुनौती देती हैं: यह सोच कि stress हमेशा नुकसानदेह होता है। उनका काम इशारा करता है कि stress के बारे में हमारी मान्यताएँ इस पर असर डाल सकती हैं कि हम उसे कैसे अनुभव करते हैं और उस पर कैसी प्रतिक्रिया करते हैं।
देखते समय ध्यान दें कि stress को हम जो मायने देते हैं, वे कभी-कभी stress पैदा करने वाली चीज़ से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण कैसे हो जाते हैं।
चिंतन
आपके लिए stress का कौन-सा पहलू ज़्यादा मुश्किल खड़ी करता है: खुद चुनौती, या चुनौती पर आपकी प्रतिक्रिया?
Rethinking Stress
Dr Crum की 2013 की study ही वह मुख्य research है जिसने stress पर Dr McGonigal की सोच बदली। दोनों talks साथ देखने से पूरी तस्वीर सामने आती है।
Dr Alia Crum की research इस बात की पड़ताल करती है कि mindsets मानवीय अनुभव को कैसे आकार देते हैं। उनका काम इशारा करता है कि हम stress की व्याख्या जिस तरह करते हैं, वह हमारे व्यवहार, resilience और खुशहाली पर असर डाल सकती है।
देखते समय इस पर सोचें कि दो लोग एक ही परिस्थिति को, उसे दिए गए अपने-अपने मायनों के आधार पर, कितने अलग-अलग ढंग से अनुभव कर सकते हैं।
चिंतन
क्या आपको कोई ऐसा मुश्किल अनुभव याद आता है जो बाद में किसी तरह फ़ायदेमंद साबित हुआ? क्या बदला—घटना, या आपने उसकी जो व्याख्या की, वह?
आज की संकल्पित गतिविधि की ओर बढ़ने से पहले, एक पल के लिए रुकें।
बुद्ध ने सिखाया कि दुःख अक्सर पहले तीर से नहीं, बल्कि दूसरे तीर से पैदा होता है। Modern behavioural science भी कुछ ऐसा ही इशारा करती है: घटनाएँ मायने रखती हैं, पर घटनाओं को हम जो मायने देते हैं, वे भी मायने रखते हैं।
आंतरिक शासन तब शुरू होता है जब हम यह पहचानते हैं कि जो होता है, उस पर शायद हमेशा हमारा control न हो। पर जो होता है, उससे हम कैसा नाता रखते हैं, इस पर हम असर डाल सकते हैं। यही संभावना स्वतंत्रता पैदा करती है।
उस चिंतन को आज की संकल्पित गतिविधि में साथ ले जाएँ।
Stress में मदद करने वाला एक कदम चुनना
आज की संकल्पित गतिविधि का नाम है ‘stress में मदद करने वाला एक कदम चुनना’।
- पहले, बस अपनी सामान्य प्रतिक्रिया पर ध्यान दें। क्या आप चिंता करने लगते हैं, अपने में सिमट जाते हैं, चिड़चिड़े हो जाते हैं, या हर चीज़ को control करने की कोशिश करते हैं? उसे judge न करें—बस उस पर ध्यान दें।
- फिर, एक ऐसा छोटा कदम चुनें जो stress को और बढ़ाने के बजाय आपको सहारा दे। यह किसी भरोसेमंद व्यक्ति को phone करना, थोड़ी देर टहलना, कोई एक महत्वपूर्ण काम पूरा करना, या प्रकृति के बीच कुछ शांत मिनट बिताना हो सकता है।
- ऐसा करते समय रुकें और खुद को याद दिलाएँ: “आज stress का सामना करने का मेरा चुनाव यही है।”
आज आप जो भी सचेत चुनाव करते हैं, वह सति को मज़बूत करता है—mindfulness की आपकी क्षमता, यानी अपने-आप react करने के बजाय जागरूकता के साथ respond करना।
स्वास्थ्य और खुशहाली की behavioural science
वैज्ञानिक पक्ष चिंतन-मनन के अभ्यासों की व्याख्या psychology, behavioural science और neuroscience की मौजूदा वैज्ञानिक समझ के आधार पर करता है। यहाँ बताए गए mechanisms इस ओर इशारा करते हैं कि ये अभ्यास ध्यान, emotional regulation, व्यवहार और खुशहाली पर कैसे असर डाल सकते हैं। वैज्ञानिक समझ लगातार विकसित हो रही है, और ये व्याख्याएँ किसी खास नतीजे की गारंटी नहीं हैं। हर व्यक्ति के अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं।
एक ही घटना अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग असर क्यों डालती है
दो लोग एक ही चुनौती का सामना कर सकते हैं।
- स्वास्थ्य से जुड़ा कोई झटका।
- पेशे से जुड़ी कोई निराशा।
- कोई मुश्किल बातचीत।
फिर भी उनकी प्रतिक्रियाएँ हैरानी की हद तक अलग हो सकती हैं। Behavioural science इशारा करती है कि घटना खुद पूरी बात का सिर्फ़ एक हिस्सा है। अक्सर उतना ही मायने यह रखता है कि मन उस घटना की व्याख्या कैसे करता है।
Psychologists इस प्रक्रिया को cognitive appraisal कहते हैं—जो कुछ होता है, उसे हम जो मायने देते हैं।
घटना और भावना के बीच की कहानी
जब कुछ होता है, तो मन तेज़ी से सवाल पूछता है:
- क्या यह खतरनाक है?
- क्या यह अन्याय है?
- क्या मुझसे यह सँभलेगा?
- यह मेरे बारे में क्या कहता है?
- आगे क्या हो सकता है?
हम जो जवाब देते हैं—अक्सर अपने-आप—वे हमारे emotional response को आकार देते हैं।
इसलिए एक ही घटना को इस तरह अनुभव किया जा सकता है:
- खतरे या चुनौती के रूप में,
- आपदा या झटके के रूप में,
- असफलता या सीख के रूप में।
घटना बिलकुल एक-सी हो सकती है। व्याख्या बहुत अलग हो सकती है।
एक व्यक्ति किसी झटके को असफलता का सबूत मान सकता है। दूसरा उसे आगे बढ़ने के लिए मिला feedback मान सकता है। बाहरी घटना मिलती-जुलती है। भीतरी appraisal अलग है।
आज के अभ्यास आंतरिक शासन को कैसे सहारा देते हैं
| अभ्यास | व्यवहार से जुड़ी क्षमता जिसे बल मिलता है |
|---|---|
| दो तीरों पर चिंतन | घटना और व्याख्या में फ़र्क करना |
| सति (mindfulness) | अपने-आप होने वाली मानसिक प्रतिक्रियाओं के प्रति जागरूकता |
| Stress mindset की शिक्षा | चुनौतियों का ज़्यादा flexible appraisal |
| Meditation का अभ्यास | प्रतिक्रिया करने से पहले gap बनाना |
Brain व्यवहार अनुभव
| स्तर | अभ्यास से क्या विकसित हो सकता है? | आप क्या महसूस कर सकते हैं |
|---|---|---|
| Brain | अनुभवों को आँकने में ज़्यादा flexibility | चीज़ों को अपने-आप खतरा समझ लेने में कमी |
| व्यवहार | दबाव में ज़्यादा सोचे-समझे responses | Impulsive प्रतिक्रियाओं में कमी |
| अनुभव | Resilience और भावनात्मक संतुलन में बढ़ोतरी | Rumination से पैदा होने वाले दुःख में कमी |
आंतरिक शासन, ENA और cognitive appraisal
आंतरिक शासन में उन व्याख्याओं के प्रति जागरूक होना शामिल है जो मन अपने-आप गढ़ता है। सति, या mindfulness, इन व्याख्याओं को सच मान लेने से पहले उन्हें देखने में हमारी मदद करती है। Mindful जागरूकता के साथ हम अपने विचारों और कहानियों में बह जाने के बजाय उन्हें परख सकते हैं। इससे यह तय करने की ज़्यादा स्वतंत्रता मिलती है कि हम जीवन की चुनौतियों पर कैसे respond करें।
सक्रिय अनासक्ति (ENA) का मतलब मुश्किल अनुभवों से बचना नहीं है। इसका मतलब है सच्चाई से पूरी तरह जुड़े रहना, और साथ ही इतनी भीतरी स्पष्टता बनाए रखना कि हम मन की गढ़ी हर व्याख्या, हर डर या हर अंदाज़े में फँस न जाएँ।
इस तरह, जागरूकता प्रतिक्रिया को response में बदलने में मदद करती है।
वैज्ञानिक सार
मन व्याख्याएँ गढ़ता है।
जागरूकता चुनाव को जन्म देती है।
आंतरिक शासन के अभ्यास का मतलब है अपने-आप प्रतिक्रिया करने से पहले उस चुनाव को पहचानना सीखना।
- दर्द जीवन का हिस्सा है; दुःख अक्सर उस दूसरे तीर से शुरू होता है जिसे हम खुद चलाते हैं।
- घटना हमारे बाहर घटती है; उसका असर हमारे भीतर आकार लेता है। गीता इस जवाब को समत्वम् कहती है, मन की समता।
- सति, या mindfulness, अपने-आप होने वाली प्रतिक्रियाओं को देखने में हमारी मदद करती है। जागरूकता एक ठहराव पैदा करती है, और उस ठहराव में चुनाव संभव हो जाता है।
- Stress अपने-आप नुकसानदेह नहीं हो जाता; हम उसे जो मायने देते हैं, वे इस पर असर डालते हैं कि शरीर कैसे respond करता है।
- घटना और हमारे अनुभव के बीच वह कहानी होती है जो मन गढ़ता है।
इससे पहले कि प्रतिक्रिया अपने-आप होने लगे
सति का अभ्यास मन की प्रतिक्रिया को, उसके अपने-आप होने से पहले, देख लेने से शुरू होता है।
आज की meditation में आप पहले कपालभाति का अभ्यास करेंगे, और उसके बाद body scan। एक ध्यान को जगाता है; दूसरा जागरूकता के साथ गहरा विश्राम विकसित करता है।
Meditation — body scanMeditation audio चलाएँ, आराम से बैठें और बस अभ्यास करें।बस निर्देशों के साथ चलें, और पूरे समय उतना ही करें जितना आपके लिए सहज हो।
Guided अभ्यास के लिए course की meditation recording का इस्तेमाल करें। नीचे दिया गया timer अकेले अभ्यास करते समय आपका शांत साथी है।
