The Life ManualTLM Basic

सप्ताह 2·दिन 12 (21 में से)

The Instrument (the Mind)

Stress दुःख क्यों बन जाता है, और mindfulness का अभ्यास

चरण 3 (7 में से) — ध्यान और एकाग्रता को साधना दिन का मूल्य — सति

Course की PDF देखें

सप्ताह 2 — दिन 12 — शुरू करने से पहले

दिन 12 में आपका स्वागत है

दूसरे तीर को पहचानें। Respond करने की स्वतंत्रता वापस पाएँ।

आज हम पूछते हैं कि कुछ लोगों के लिए stress दुःख क्यों बन जाता है, जबकि दूसरों के लिए नहीं। एक ही बैठक में धीरे-धीरे पढ़ें, जब सुविधा हो तब विशेषज्ञों के दोनों videos देखें, और दिन के इस सवाल को अपने साथ लेकर चलें।

आज की रूपरेखा

  1. आरंभ — stress दुःख क्यों बन जाता हैजीवन-यात्रा, और समाधान (भीतरी स्थिरता) से आगे का पुल।
  2. शिक्षा — मन की समता और दो तीरगीता का समत्वम् और बुद्ध का दूसरा आर्य सत्य।
  3. दिन का मूल्य — सतिMindfulness: अपनी प्रतिक्रियाओं को, उनमें बह जाने से पहले, देख लेना।
  4. स्वास्थ्य खंड — मायने stress response को कैसे आकार देते हैंStress और mindset पर Dr Kelly McGonigal और Dr Alia Crum।
  5. विशेषज्ञों की अंतर्दृष्टि (वैकल्पिक सामग्री)Stress, mindset और मायनों पर दो videos (लगभग 33 मिनट)।
  6. संकल्पित गतिविधि — stress में मदद करने वाला एक कदम चुननाजागरूकता के साथ चुना गया एक छोटा कदम।
  7. वैज्ञानिक पक्ष और समापनघटना, कहानी और अनुभव; कपालभाति और body scan।
आपको चाहिए
  • पढ़ने के लिए एक शांत जगह, और चिंतन के खाली स्थानों के लिए एक पेन।
  • विशेषज्ञों के दो videos (33 मिनट) के लिए phone या computer।
  • दिन 12 का meditation audio।
आपकी यात्रा पर एक टिप्पणी

जीवन व्यस्त हो सकता है। अगर ज़रूरी लगे तो 21 दिनों से ज़्यादा समय लें; जल्दबाज़ी की कोई ज़रूरत नहीं है। अगर आप TLM Basic के अगले दिन पर न जा पाएँ, तो जो दिन आपने आखिरी बार पूरा किया था, उसी दिन के मूल्य, संकल्पित गतिविधि और meditation का अभ्यास करते रहें। जब आप तैयार हों, तो programme वहीं से फिर शुरू करें जहाँ आपने छोड़ा था।

आरंभ — दिन 11 से पुल

Stress दुःख क्यों बन जाता है

कल हमने समाधान को जाना—वह भीतरी स्थिरता जो विचारों के उठने पर भी मन को स्थिर रहने देती है।
जीवन-यात्रा: चार पहियों वाले वाहन में बैठा यात्री, उगते सूरज की ओर जाती सड़क पर। पहिए हैं संबंध, पेशा और कार्य, वित्त, और मूल्य और नैतिकता।
चित्र 1आज यात्री केंद्र में आता है: वह चेतना जो मन की प्रतिक्रिया को, उसके दुःख बनने से पहले, देख सकती है।

आज हम अगला कदम उठाते हैं।

अगर stress जीवन का हिस्सा है, तो वह कुछ लोगों के लिए दुःख क्यों बन जाता है, और दूसरों के लिए क्यों नहीं?

इसका जवाब सिर्फ़ इसमें नहीं है कि हमारे साथ क्या होता है, बल्कि इसमें भी है कि मन उस पर कैसी प्रतिक्रिया करता है। आइए, देखें ऐसा क्यों है।

शिक्षा — आध्यात्मिक और दार्शनिक आधार

मन की समता

गीता और बुद्ध एक ही सवाल का जवाब अलग-अलग भाषा में देते हैं।
पंचकोश, अद्वैत वेदांत के पाँच कोश, एक के भीतर एक, पाँच परतों के रूप में। बाहर से भीतर की ओर: अन्नमय कोश, स्थूल शरीर का कोश, आज धुँधला; फिर मानसिक साधन के तीन कोश, सुनहरे रंग में उभारे गए: प्राणमय कोश, प्राण का कोश, जिस पर दिन 8 से दिन 13 तक काम हुआ; मनोमय कोश, मन का कोश; विज्ञानमय कोश, बुद्धि का कोश; और सबसे भीतर आनंदमय कोश, आनंद, पत्थर के रंग में, ‘आगे’ के रूप में चिह्नित। कोशों के बाहर, बाईं ओर, हल्की आभा वाला एक सुनहरा बिंदु: यात्री, चेतना, जिससे सुनहरी किरणों का एक फैलता हुआ पंखा निकलता है, जो सबसे बाहरी कोश के ऊपरी सिरे से उसके निचले सिरे तक, पाँचों कोशों को अपने घेरे में ले लेता है। पाँचों कोश मिलकर साधन हैं; जो चेतना इन्हें देखती है, वही यात्री है। अन्नमय कोश — स्थूल शरीर का कोश प्राणमय कोश — प्राण का कोश मनोमय कोश — मन विज्ञानमय — बुद्धि आनंद यात्री चेतना पाँच कोश पंचकोश, अद्वैत वेदांत अन्नमय कोशस्थूल शरीर — दिन 8–10 प्राणमय कोशसाँस और प्राण-शक्तिदिन 8–13 मनोमय कोशविचार और भावनाएँ विज्ञानमय कोशबुद्धि और विवेक आनंदमय कोशआनंद, सबसे भीतरी कोशआगे मानसिक साधन दिन 11 से 13 पाँचों कोश मिलकर साधन हैं। जो चेतना इन्हें देखती है, वही यात्री है। दिन 12 — मानसिक साधन
चित्र 2मानसिक साधन पर काम जारी है: प्राण, मन और बुद्धि के कोश, जिनकी पड़ताल पहली बार दिन 11 में हुई।

पंचकोश model हमें स्थूल शरीर से लेकर विचार, भावना और बुद्धि के ज़्यादा सूक्ष्म पहलुओं तक, अपने अनुभव के अलग-अलग पहलुओं को समझने में मदद करता है। पिछले दिनों में, मानसिक साधन की ओर मुड़ने से पहले, हमने स्थूल शरीर और प्राण के कोशों की पड़ताल की। अब हम इसी पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए देखते हैं कि मन जीवन की घटनाओं पर कैसी प्रतिक्रिया करता है और वे प्रतिक्रियाएँ हमारे अनुभव को कैसे आकार देती हैं।

हम अपना भीतरी संतुलन खोए बिना इन अनुभवों का सामना कैसे कर सकते हैं?

भगवद्गीता इसका जवाब एक शब्द में देती है—समत्वम्, मन की समता।

भगवद्गीता 2.48योगस्थः कुरु कर्माणि सङ्गं त्यक्त्वा धनञ्जय ।
सिद्ध्यसिद्ध्योः समो भूत्वा समत्वं योग उच्यते ॥
Yogasthaḥ kuru karmāṇi saṅgam tyaktvā Dhanañjaya,
siddhy-asiddhyoḥ samo bhūtvā samatvam yoga ucyate.
हे धनंजय, योग में स्थित होकर, आसक्ति छोड़कर और सफलता-असफलता में सम रहकर अपने कर्म करो। मन की यही समता योग कहलाती है।
अर्जुन को कृष्ण की सलाह: पूरी तरह कर्म करना, और सफलता हो या असफलता, उसका सामना सम मन से करना।
चित्र 3गीता एक शब्द में जवाब देती है: समत्वम्, मन की समता।

कृष्ण ऐसे जीवन का वादा नहीं करते जिसमें सफलता और असफलता, लाभ और हानि, तारीफ़ और आलोचना न हों। ये जीवन का हिस्सा हैं। असल बात यह है कि हम किस भीतरी संतुलन के साथ इनका सामना करते हैं।

घटना हमारे बाहर घटती है।
उसका असर हमारे भीतर आकार लेता है।

बुद्ध की अंतर्दृष्टि

बुद्ध ने यही सत्य दूसरे आर्य सत्य के ज़रिए कहा। दर्द अनिवार्य है। पर जब मन सच्चाई का विरोध करता है, तब दुःख बढ़ता है। हम इस बात से गहरे बँध जाते हैं कि जीवन कैसे चलना चाहिए, लोगों को कैसा व्यवहार करना चाहिए और घटनाओं का नतीजा क्या होना चाहिए। जब सच्चाई इन उम्मीदों से अलग होती है, तो जो हो रहा है, हम उसके खिलाफ़ संघर्ष करने लगते हैं और इस तरह अपना दुःख और बढ़ा लेते हैं।

  • “यह नहीं होना चाहिए।”
  • “मुझसे यह सहा नहीं जाता।”

सच्चाई के खिलाफ़ संघर्ष अक्सर खुद सच्चाई से ज़्यादा भारी हो जाता है।

भाषा अलग। अंतर्दृष्टि वही।

दो तीर

बुद्ध ने इसे दो तीरों की शिक्षा से समझाया। पहला तीर खुद जीवन है—बीमारी, हानि, असफलता, टकराव, निराशा। इससे कोई नहीं बचता।

दूसरा तीर मन चलाता है—कहानी, कड़वाहट, मन में बात को बार-बार दोहराते रहना, विरोध।

पहला तीर दर्द देता है। दूसरा तीर बेवजह का दुःख पैदा करता है।

बुद्ध के दो तीर, बैठी हुई एक युवती की engraving के रूप में। बाईं ओर से एक गहरा नीला तीर उसके कंधे पर आकर लगता है: पहला तीर, सच्चाई, जिस पर लिखा है बीमारी, हानि, आलोचना, असफलता, टकराव और निराशा। पहला तीर है जीवन का घटनाक्रम। दाईं ओर, वह अपने उठे हुए हाथ में एक सुनहरा तीर थामे है, जिसकी नोक उसी की ओर है: दूसरा तीर, प्रतिक्रिया, जिस पर लिखा है विरोध, rumination, self-pity, catastrophising, दोष देना और “मैं ही क्यों?”। दूसरा तीर है वह दुःख जो हम जोड़ते हैं। चित्र के नीचे: दर्द अनिवार्य है। दूसरे तीर की चुभन कम की जा सकती है। पहला तीर सच्चाई बीमारी हानि आलोचना असफलता टकराव निराशा पहला तीर है जीवन का घटनाक्रम। दूसरा तीर प्रतिक्रिया विरोध Rumination Self-pity Catastrophising दोष देना “मैं ही क्यों?” दूसरा तीर है वह दुःख जो हम जोड़ते हैं। दर्द अनिवार्य है। दूसरे तीर की चुभन कम की जा सकती है।
चित्र 4बुद्ध के दो तीर: पहला तीर खुद जीवन है; दूसरा मन चलाता है।
TLM में दो तीर

आंतरिक शासन तब शुरू होता है जब हम दूसरे तीर को अपने-आप चला देने से पहले पहचान लेते हैं।

सक्रिय अनासक्ति (ENA) का मतलब है दूसरे तीर के ज़रिए बेवजह का दुःख पैदा किए बिना पहले तीर पर समझदारी से respond करना।

दूसरा तीर तब पैदा होता है जब हम जीवन के दिए दर्द पर अपने-आप प्रतिक्रिया करते हैं।

सति — mindfulness — इस प्रतिक्रिया को उठते ही पहचानने में हमारी मदद करती है, इससे पहले कि हम उसमें बह जाएँ।

जागरूकता के उस पल में, जो होता है और हम उस पर कैसे respond करते हैं, इन दोनों के बीच हम एक gap बना लेते हैं। यही gap ज़्यादा समझदारी भरा response संभव बनाता है।

यही व्यवहार में mindfulness है, और आंतरिक शासन का एक व्यावहारिक रूप।

आंतरिक शासन और ENA

आंतरिक शासन

“दबाव में भी ध्यान, भावना और व्यवहार को regulate करने की अनुशासित क्षमता — व्यक्तिगत मूल्यों और संस्था के ethos के साथ alignment में, सोचे हुए लक्ष्य को पूरा करने के लिए।”

सक्रिय अनासक्ति (ENA)

“आप जो भी भूमिका निभाते हैं, उसमें पूरी तरह मौजूद रहने, हर ज़िम्मेदारी में पूरी तरह सक्रिय रहने और हर संबंध में पूरी तरह प्रतिबद्ध रहने की प्रशिक्षित क्षमता—इनमें से किसी एक से भी परिभाषित, संचालित या अस्थिर हुए बिना।”

बुद्ध की दो तीरों वाली शिक्षा आंतरिक शासन का एक व्यावहारिक रूप है। पहला तीर जीवन के घटनाक्रम का प्रतीक है। दूसरा तीर उस दुःख का प्रतीक है जो अपने-आप होने वाली प्रतिक्रिया से पैदा होता है।

सक्रिय अनासक्ति (ENA) का मतलब है विरोध, आसक्ति या मन में बातों को बार-बार दोहराने के ज़रिए बेवजह का दुःख जोड़े बिना सच्चाई से पूरी तरह जुड़े रहना।

इस फ़र्क को पहचान पाने की क्षमता ही व्यवहार में आंतरिक शासन है।

दिन का मूल्य

सति

Mindfulness

कल हमने समाधान को जाना—वह भीतरी स्थिरता जो विचारों के उठने पर भी हमें स्थिर रहने देती है। आज हम उसी स्थिरता पर आगे बढ़ते हुए यह पहचानना सीखते हैं कि प्रतिक्रिया करने से पहले हमारे भीतर क्या होता है।

बौद्ध परंपरा इस गुण को सति कहती है, जिसका अनुवाद आमतौर पर mindfulness किया जाता है।

Mindfulness वर्तमान पल में जो हो रहा है, उसके प्रति जागरूक रहने की क्षमता है—अपने विचारों, भावनाओं, शारीरिक संवेदनाओं और प्रतिक्रियाओं को, तुरंत उनमें बहे बिना, देख पाने की क्षमता।

सोचें कि जब कोई आपकी आलोचना करता है, तो क्या होता है। झुँझलाहट उठ सकती है। मन एक कहानी गढ़ने लगता है। आपको अपना बचाव करने, पलटवार करने या पीछे हट जाने की इच्छा हो सकती है। अक्सर प्रतिक्रिया इससे पहले ही शुरू हो जाती है कि आप पहचान भी पाएँ कि क्या हो रहा है।

सति हमें इस प्रक्रिया को उसी समय देखने में मदद करती है, जब वह घट रही होती है।

आप झुँझलाहट को पहचानते हैं। आप उसके साथ चल रहे विचारों पर ध्यान देते हैं। आप प्रतिक्रिया करने के impulse के प्रति जागरूक हो जाते हैं। आप जो महसूस करते हैं, उसे दबाने की ज़रूरत नहीं है, और न ही तुरंत उस पर अमल करने की।

आप बस जागरूक हो जाते हैं।

जागरूकता एक ठहराव पैदा करती है। उस ठहराव में चुनाव संभव हो जाता है।

दो तीरों की शिक्षा में mindfulness का यही व्यावहारिक महत्व है। हम शायद पहले तीर को न रोक पाएँ—वह दर्द जो जीवन कभी-कभी हमें देता है। पर अपनी प्रतिक्रियाओं पर ध्यान देकर हम उस अतिरिक्त दुःख को कम कर सकते हैं जो विरोध, rumination और आदतन प्रतिक्रियाओं से पैदा होता है।

TLM में आप पहले से ही इसका अभ्यास करते आ रहे हैं। हर बार जब आप देखते हैं कि आपका ध्यान भटक गया है और धीरे से उसे वापस ले आते हैं, तो आप मन क्या कर रहा है, यह पहचानने और अपने ध्यान को फिर से दिशा देने की क्षमता को train कर रहे होते हैं।

आज का body scan इसी अभ्यास को आगे बढ़ाता है। शरीर के अलग-अलग हिस्सों में संवेदनाओं को देखते हुए, judge करने, विरोध करने या तुरंत प्रतिक्रिया करने के किसी भी झुकाव पर ध्यान दें। किसी खास अनुभव को ज़बरदस्ती लाने की ज़रूरत नहीं है। जो मौजूद है, जितना हो सके, बस उसे देखें।

आज पूरे दिन, बीच-बीच में रुकें और खुद से चार सवाल पूछें:

  • इस समय मेरे मन में कौन-से विचार चल रहे हैं?
  • इस समय मुझे क्या महसूस हो रहा है?
  • जो हो रहा है, उस पर मेरी प्रतिक्रिया कैसी है?
  • क्या मेरी प्रतिक्रिया उस बात से मेल खाती है जो मेरे लिए सचमुच मायने रखती है?

इन सवालों का इस्तेमाल खुद की आलोचना करने के लिए न करें। इनका इस्तेमाल ज़्यादा साफ़ देखने के लिए करें।

Mindfulness का मतलब जीवन से पीछे हट जाना या निष्क्रिय हो जाना नहीं है। इसका मतलब है इतना मौजूद रहना कि हम हर विचार, भावना या impulse के इशारे पर अपने-आप चलने के बजाय सचेत होकर respond कर सकें।

जैसे-जैसे यह क्षमता बढ़ती है, हम अपने ध्यान पर शासन करने, अपनी भावनाओं को regulate करने और अपने मूल्यों के हिसाब से अपने कर्म चुनने में ज़्यादा सक्षम होते जाते हैं।

यही व्यवहार में सति है—और आंतरिक शासन की ओर एक कदम।

दोराहे पर सति, एक engraving। पीछे से दिखता एक यात्री उस जगह स्थिर खड़ा है जहाँ रास्ता दो हिस्सों में बँटता है; उसके हाथ में एक लालटेन है, जो थोड़ा आगे की ओर उठी हुई है। बायाँ रास्ता, जिस पर लिखा है बिना सोचे प्रतिक्रिया (आदत, impulse, conditioning), बहुत घिसा हुआ और गहरी लीकों से भरा है और अँधेरे किनारों के बीच मुड़कर दूर चला जाता है। दायाँ रास्ता, जिस पर लिखा है सचेत response (जागरूक, सचेत और समझदार), खुला और साफ़ है, लालटेन की सुनहरी रोशनी में है और एक शांत क्षितिज की ओर ले जाता है। लालटेन पर लिखा है सति: mindfulness। बिना सोचे प्रतिक्रिया आदत, impulse, conditioning सति mindfulness सचेत response जागरूक, सचेत और समझदार
चित्र 5सति आगे का रास्ता रोशन करती है: उसके पैदा किए ठहराव में सचेत response संभव हो जाता है।
स्वास्थ्य खंड — भाग 1: विज्ञान को समझना

मायने stress response को कैसे आकार देते हैं

कल हमने देखा कि chronic stress शरीर और मन पर क्या असर डाल सकता है।

आज हम एक अलग सवाल पूछते हैं। क्या समस्या खुद stress है, या stress से हमारा रिश्ता भी मायने रखता है?

Dr Kelly McGonigal अपनी talk How to Make Stress Your Friend में समझाती हैं कि शरीर के stress response को किसी चुनौती की तैयारी के रूप में देखने से हमारी प्रतिक्रिया का ढंग किस तरह बदल सकता है। वे stress के एक ऐसे पहलू की ओर भी ध्यान दिलाती हैं जो अक्सर अनदेखा रह जाता है: stress हमें दूसरों तक पहुँचने, सहारा माँगने और जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकता है।

Keller और उनके साथियों की एक study (2012) में पाया गया कि जिन लोगों ने अपना stress ज़्यादा बताया और जो यह भी मानते थे कि stress उनके स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाता है, उनमें समय से पहले मौत का risk बढ़ा हुआ था। यह एक observational study का निष्कर्ष है; यह साबित नहीं करता कि अपनी मान्यताएँ बदलने से स्वास्थ्य सुधरता है, पर यह इशारा करता है कि stress के बारे में हमारी मान्यताएँ मायने रख सकती हैं।

Dr Alia Crum और उनके साथियों (2017) ने प्रयोगों के ज़रिए stress mindsets की study की और पाया कि जब हिस्सा लेने वालों को stress को अपनी क्षमता घटाने वाला नहीं, बल्कि बढ़ाने वाला मानने के लिए प्रोत्साहित किया गया, तो उनके कुछ psychological और hormonal responses में फ़र्क दिखा। ये निष्कर्ष इशारा करते हैं कि mindset stress response के कुछ पहलुओं पर असर डाल सकता है, हालाँकि नतीजे अलग-अलग होते हैं।

एक मुश्किल परिस्थिति, दो तरह से देखी गई। सबसे ऊपर, पीछे से दिखता एक व्यक्ति एक बड़े पत्थर के सामने खड़ा है: परिस्थिति। उसी व्यक्ति से दो रास्ते निकलते हैं, जिन पर लिखा है दो व्याख्याएँ। बाईं ओर, खतरा मानने पर: विचारों के बुलबुले में लिखा है यह बहुत भारी है। मुझसे नहीं सँभलेगा; आकृति हाथ बाँधे मुँह फेर लेती है और पीछे हटती है: डर और पीछे हटना। दाईं ओर, चुनौती मानने पर: विचारों के बुलबुले में लिखा है यह मुश्किल है। मैं कैसे respond करूँ?; आकृति आगे कदम बढ़ाती है और एक साथी का हाथ थाम लेती है: जुड़ाव और सहारा। परिस्थिति वही है; व्याख्या अलग है। एक मुश्किल परिस्थिति दो व्याख्याएँ खतरा मानने पर यह बहुत भारी है। मुझसे नहीं सँभलेगा। डर और पीछे हटना चुनौती मानने पर यह मुश्किल है। मैं कैसे respond करूँ? जुड़ाव और सहारा
चित्र 6हम stress की जो व्याख्या करते हैं, वह इस पर असर डाल सकती है कि हम कैसी प्रतिक्रिया करते हैं। अनुभव और प्रतिक्रियाएँ हर व्यक्ति में अलग-अलग होती हैं।

परिस्थिति वही रह सकती है, पर हम उसकी व्याख्या कैसे करते हैं और उस पर कैसी प्रतिक्रिया करते हैं, यह अलग हो सकता है।

भाग 2 — सबको एक सूत्र में पिरोना

Keller और उनके साथियों, Dr Kelly McGonigal और Dr Alia Crum की research इस बात पर अलग-अलग तरह से रोशनी डालती है कि हमारी मान्यताएँ और व्याख्याएँ stress से हमारे रिश्ते पर कैसे असर डाल सकती हैं।

Stress जीवन का हिस्सा है। मायने यह भी रखता है कि हम उसे कैसे समझते हैं और उस पर कैसी प्रतिक्रिया करते हैं।

यह हमें फिर आज के मूल्य पर ले आता है: सति — mindfulness। Mindfulness हमें यह देखने में मदद करती है कि क्या हो रहा है, इससे पहले कि डर, विरोध या catastrophising हावी हो जाए।

जागरूकता शायद घटना को न बदल पाए, पर वह यह बदल सकती है कि हम कैसे respond करते हैं।

विशेषज्ञों की अंतर्दृष्टि

Stress और दुःख पर प्राचीन ज्ञान और आधुनिक विज्ञान

आज की शिक्षा में हमने बुद्ध की सबसे गहरी अंतर्दृष्टियों में से एक को जाना।
दर्द जीवन का हिस्सा है।
दुःख अक्सर उस दूसरे तीर से शुरू होता है जिसे हम खुद चलाते हैं।

Modern psychology और behavioural science हैरानी की हद तक मिलते-जुलते नतीजे पर पहुँचती हैं। हम जिन घटनाओं से गुज़रते हैं, वे मायने रखती हैं। पर हम उन घटनाओं की व्याख्या कैसे करते हैं, उनसे कैसा नाता रखते हैं और उन पर कैसी प्रतिक्रिया करते हैं, यह भी अक्सर उतना ही मायने रखता है।

आगे दी गई विशेषज्ञों की अंतर्दृष्टियाँ इस बात की पड़ताल करती हैं कि stress हमारे जीवन पर जिस तरह असर डालता है, उसे हमारा mindset, हमारी व्याख्या और प्रतिक्रिया कैसे प्रभावित कर सकते हैं।

देखते समय एक सीधे-से सवाल पर सोचेंक्या मेरी प्रतिक्रिया मुख्य रूप से सच्चाई के प्रति है, या उस कहानी के प्रति जो मेरा मन सच्चाई के बारे में गढ़ रहा है?

देखते हुए notes

Video 1 — 14 मिनट 28 सेकंड — YouTube

How to Make Stress Your Friend

विशेषज्ञ: Dr Kelly McGonigal, PhD — Health Psychologist, Stanford University (Graduate School of Business और School of Medicine)
लेखिका: The Upside of Stress; The Willpower Instinct

Kelly McGonigal एक आम सोच को चुनौती देती हैं: यह सोच कि stress हमेशा नुकसानदेह होता है। उनका काम इशारा करता है कि stress के बारे में हमारी मान्यताएँ इस पर असर डाल सकती हैं कि हम उसे कैसे अनुभव करते हैं और उस पर कैसी प्रतिक्रिया करते हैं।

देखते समय ध्यान दें कि stress को हम जो मायने देते हैं, वे कभी-कभी stress पैदा करने वाली चीज़ से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण कैसे हो जाते हैं।

अगर URL बदल जाए, तो यह search करें: Kelly McGonigal stress friend TED.

चिंतन

आपके लिए stress का कौन-सा पहलू ज़्यादा मुश्किल खड़ी करता है: खुद चुनौती, या चुनौती पर आपकी प्रतिक्रिया?

Video 2 — 18 मिनट 20 सेकंड — YouTube

Rethinking Stress

विशेषज्ञ: Dr Alia Crum, PhD — psychology की Associate Professor, Stanford University; Director, Stanford Mind and Body Lab
लेखिका: ‘Rethinking Stress’, Journal of Personality and Social Psychology (2013)

Dr Crum की 2013 की study ही वह मुख्य research है जिसने stress पर Dr McGonigal की सोच बदली। दोनों talks साथ देखने से पूरी तस्वीर सामने आती है।

Dr Alia Crum की research इस बात की पड़ताल करती है कि mindsets मानवीय अनुभव को कैसे आकार देते हैं। उनका काम इशारा करता है कि हम stress की व्याख्या जिस तरह करते हैं, वह हमारे व्यवहार, resilience और खुशहाली पर असर डाल सकती है।

देखते समय इस पर सोचें कि दो लोग एक ही परिस्थिति को, उसे दिए गए अपने-अपने मायनों के आधार पर, कितने अलग-अलग ढंग से अनुभव कर सकते हैं।

YouTube पर यह talk “Change your mindset, change the game” (TEDxTraverseCity) नाम से है। अगर URL बदल जाए, तो यह search करें: Alia Crum TED stress mindset.

चिंतन

क्या आपको कोई ऐसा मुश्किल अनुभव याद आता है जो बाद में किसी तरह फ़ायदेमंद साबित हुआ? क्या बदला—घटना, या आपने उसकी जो व्याख्या की, वह?

एकीकरण-चिंतन

आज की संकल्पित गतिविधि की ओर बढ़ने से पहले, एक पल के लिए रुकें।

बुद्ध ने सिखाया कि दुःख अक्सर पहले तीर से नहीं, बल्कि दूसरे तीर से पैदा होता है। Modern behavioural science भी कुछ ऐसा ही इशारा करती है: घटनाएँ मायने रखती हैं, पर घटनाओं को हम जो मायने देते हैं, वे भी मायने रखते हैं।

आंतरिक शासन तब शुरू होता है जब हम यह पहचानते हैं कि जो होता है, उस पर शायद हमेशा हमारा control न हो। पर जो होता है, उससे हम कैसा नाता रखते हैं, इस पर हम असर डाल सकते हैं। यही संभावना स्वतंत्रता पैदा करती है।

उस चिंतन को आज की संकल्पित गतिविधि में साथ ले जाएँ।

संकल्पित गतिविधि

Stress में मदद करने वाला एक कदम चुनना

किसी एक ऐसी परिस्थिति के बारे में सोचें जो आज आपको stress दे रही है।

आज की संकल्पित गतिविधि का नाम है ‘stress में मदद करने वाला एक कदम चुनना’।

  1. पहले, बस अपनी सामान्य प्रतिक्रिया पर ध्यान दें। क्या आप चिंता करने लगते हैं, अपने में सिमट जाते हैं, चिड़चिड़े हो जाते हैं, या हर चीज़ को control करने की कोशिश करते हैं? उसे judge न करें—बस उस पर ध्यान दें।
  2. फिर, एक ऐसा छोटा कदम चुनें जो stress को और बढ़ाने के बजाय आपको सहारा दे। यह किसी भरोसेमंद व्यक्ति को phone करना, थोड़ी देर टहलना, कोई एक महत्वपूर्ण काम पूरा करना, या प्रकृति के बीच कुछ शांत मिनट बिताना हो सकता है।
  3. ऐसा करते समय रुकें और खुद को याद दिलाएँ: “आज stress का सामना करने का मेरा चुनाव यही है।”

आज आप जो भी सचेत चुनाव करते हैं, वह सति को मज़बूत करता है—mindfulness की आपकी क्षमता, यानी अपने-आप react करने के बजाय जागरूकता के साथ respond करना।

वैज्ञानिक पक्ष

स्वास्थ्य और खुशहाली की behavioural science

एक ही घटना अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग असर क्यों डालती है, और जागरूकता प्रतिक्रिया को response में कैसे बदलती है।
विज्ञान पर एक टिप्पणी

वैज्ञानिक पक्ष चिंतन-मनन के अभ्यासों की व्याख्या psychology, behavioural science और neuroscience की मौजूदा वैज्ञानिक समझ के आधार पर करता है। यहाँ बताए गए mechanisms इस ओर इशारा करते हैं कि ये अभ्यास ध्यान, emotional regulation, व्यवहार और खुशहाली पर कैसे असर डाल सकते हैं। वैज्ञानिक समझ लगातार विकसित हो रही है, और ये व्याख्याएँ किसी खास नतीजे की गारंटी नहीं हैं। हर व्यक्ति के अनुभव अलग-अलग हो सकते हैं।

एक ही घटना अलग-अलग लोगों पर अलग-अलग असर क्यों डालती है

दो लोग एक ही चुनौती का सामना कर सकते हैं।

  • स्वास्थ्य से जुड़ा कोई झटका।
  • पेशे से जुड़ी कोई निराशा।
  • कोई मुश्किल बातचीत।

फिर भी उनकी प्रतिक्रियाएँ हैरानी की हद तक अलग हो सकती हैं। Behavioural science इशारा करती है कि घटना खुद पूरी बात का सिर्फ़ एक हिस्सा है। अक्सर उतना ही मायने यह रखता है कि मन उस घटना की व्याख्या कैसे करता है।

Psychologists इस प्रक्रिया को cognitive appraisal कहते हैं—जो कुछ होता है, उसे हम जो मायने देते हैं।

घटना और भावना के बीच की कहानी

जब कुछ होता है, तो मन तेज़ी से सवाल पूछता है:

  • क्या यह खतरनाक है?
  • क्या यह अन्याय है?
  • क्या मुझसे यह सँभलेगा?
  • यह मेरे बारे में क्या कहता है?
  • आगे क्या हो सकता है?

हम जो जवाब देते हैं—अक्सर अपने-आप—वे हमारे emotional response को आकार देते हैं।

इसलिए एक ही घटना को इस तरह अनुभव किया जा सकता है:

  • खतरे या चुनौती के रूप में,
  • आपदा या झटके के रूप में,
  • असफलता या सीख के रूप में।

घटना बिलकुल एक-सी हो सकती है। व्याख्या बहुत अलग हो सकती है।

एक व्यक्ति किसी झटके को असफलता का सबूत मान सकता है। दूसरा उसे आगे बढ़ने के लिए मिला feedback मान सकता है। बाहरी घटना मिलती-जुलती है। भीतरी appraisal अलग है।

आज के अभ्यास आंतरिक शासन को कैसे सहारा देते हैं

अभ्यासव्यवहार से जुड़ी क्षमता जिसे बल मिलता है
दो तीरों पर चिंतनघटना और व्याख्या में फ़र्क करना
सति (mindfulness)अपने-आप होने वाली मानसिक प्रतिक्रियाओं के प्रति जागरूकता
Stress mindset की शिक्षाचुनौतियों का ज़्यादा flexible appraisal
Meditation का अभ्यासप्रतिक्रिया करने से पहले gap बनाना

Brain व्यवहार अनुभव

स्तरअभ्यास से क्या विकसित हो सकता है?आप क्या महसूस कर सकते हैं
Brainअनुभवों को आँकने में ज़्यादा flexibilityचीज़ों को अपने-आप खतरा समझ लेने में कमी
व्यवहारदबाव में ज़्यादा सोचे-समझे responsesImpulsive प्रतिक्रियाओं में कमी
अनुभवResilience और भावनात्मक संतुलन में बढ़ोतरीRumination से पैदा होने वाले दुःख में कमी

आंतरिक शासन, ENA और cognitive appraisal

आंतरिक शासन में उन व्याख्याओं के प्रति जागरूक होना शामिल है जो मन अपने-आप गढ़ता है। सति, या mindfulness, इन व्याख्याओं को सच मान लेने से पहले उन्हें देखने में हमारी मदद करती है। Mindful जागरूकता के साथ हम अपने विचारों और कहानियों में बह जाने के बजाय उन्हें परख सकते हैं। इससे यह तय करने की ज़्यादा स्वतंत्रता मिलती है कि हम जीवन की चुनौतियों पर कैसे respond करें।

सक्रिय अनासक्ति (ENA) का मतलब मुश्किल अनुभवों से बचना नहीं है। इसका मतलब है सच्चाई से पूरी तरह जुड़े रहना, और साथ ही इतनी भीतरी स्पष्टता बनाए रखना कि हम मन की गढ़ी हर व्याख्या, हर डर या हर अंदाज़े में फँस न जाएँ।

इस तरह, जागरूकता प्रतिक्रिया को response में बदलने में मदद करती है।

वैज्ञानिक सार

जीवन घटनाएँ सामने लाता है।
मन व्याख्याएँ गढ़ता है।
जागरूकता चुनाव को जन्म देती है।

आंतरिक शासन के अभ्यास का मतलब है अपने-आप प्रतिक्रिया करने से पहले उस चुनाव को पहचानना सीखना।

घटना, कहानी, अनुभव: तीन columns वाला एक flow diagram, जिसे बाएँ से दाएँ पढ़ा जाता है; columns के ऊपर लिखा है घटना, कहानी या व्याख्या, और अनुभव। एक ही घटना, आलोचना, दो रास्तों में बँटती है। ऊपर के, अपने-आप चलने वाले रास्ते पर मन कहानी कहता है “मैं असफल हूँ”, और अनुभव है दुःख। नीचे के, सुनहरे रंग में चिह्नित रास्ते पर कहानी को परखा जाता है, “इसमें कुछ काम की बात हो सकती है”, और अनुभव है सीख। दोनों कहानियों के बीच ‘बनाम’ शब्द है। कहानी वाले column के चारों ओर टूटी रेखाओं वाला एक सुनहरा frame है, जिस पर लिखा है जागरूकता कहानी को परखती है। चित्र के नीचे: आंतरिक शासन उस कहानी को परखने की क्षमता विकसित करता है, उस पर अपने-आप विश्वास करने से पहले। घटनाकहानी / व्याख्याअनुभव जागरूकता कहानी को परखती है आलोचना “मैं असफल हूँ” दुःख बनाम “इसमें कुछ काम कीबात हो सकती है” सीख आंतरिक शासन उस कहानी को परखने की क्षमता विकसित करता है, उस पर अपने-आप विश्वास करने से पहले।
चित्र 7घटना और हमारे अनुभव के बीच वह कहानी होती है जो मन गढ़ता है।
दिन 12 संक्षेप में — क्या साथ ले जाएँ
  • दर्द जीवन का हिस्सा है; दुःख अक्सर उस दूसरे तीर से शुरू होता है जिसे हम खुद चलाते हैं।
  • घटना हमारे बाहर घटती है; उसका असर हमारे भीतर आकार लेता है। गीता इस जवाब को समत्वम् कहती है, मन की समता।
  • सति, या mindfulness, अपने-आप होने वाली प्रतिक्रियाओं को देखने में हमारी मदद करती है। जागरूकता एक ठहराव पैदा करती है, और उस ठहराव में चुनाव संभव हो जाता है।
  • Stress अपने-आप नुकसानदेह नहीं हो जाता; हम उसे जो मायने देते हैं, वे इस पर असर डालते हैं कि शरीर कैसे respond करता है।
  • घटना और हमारे अनुभव के बीच वह कहानी होती है जो मन गढ़ता है।
समापन — meditation की ओर पुल

इससे पहले कि प्रतिक्रिया अपने-आप होने लगे

आज आपने जाना कि stress सिर्फ़ घटना की वजह से दुःख नहीं बनता, बल्कि इस वजह से बनता है कि मन उस पर किस तरह प्रतिक्रिया करता है।

सति का अभ्यास मन की प्रतिक्रिया को, उसके अपने-आप होने से पहले, देख लेने से शुरू होता है।

कलअगर दुःख उन कहानियों से प्रभावित होता है जो हम खुद को सुनाते हैं, तो हम अपने ध्यान को ज़्यादा समझदारी से दिशा देना कैसे सीखें?इसी पर हम कल विचार करेंगे।

आज की meditation में आप पहले कपालभाति का अभ्यास करेंगे, और उसके बाद body scan। एक ध्यान को जगाता है; दूसरा जागरूकता के साथ गहरा विश्राम विकसित करता है।

प्राणायाम — कपालभाति
Meditation — body scan
Meditation audio चलाएँ, आराम से बैठें और बस अभ्यास करें।बस निर्देशों के साथ चलें, और पूरे समय उतना ही करें जितना आपके लिए सहज हो।
कृपया ध्यान दें। अगर आपको high blood pressure या cardiovascular disease है, पहले कभी stroke हुआ है, या मिर्गी, hernia या vertigo की समस्या है, तो कपालभाति से बचें; pregnancy के दौरान भी इससे बचें। शक हो तो अपने doctor से सलाह लें; इसकी जगह धीमी, गहरी स्वाभाविक साँस लेने का अभ्यास करें।

Guided अभ्यास के लिए course की meditation recording का इस्तेमाल करें। नीचे दिया गया timer अकेले अभ्यास करते समय आपका शांत साथी है।

चिंतन

यात्री के लिए notes

आज आपने जो देखा-समझा, उसके लिए एक पृष्ठ

आज कोई पहला तीर आप तक कहाँ पहुँचा, और मन ने कौन-सा दूसरा तीर चलाना शुरू किया?

किसी मुश्किल पल के बारे में आपके मन ने कौन-सी कहानी कही, और उसके अलावा और क्या सच हो सकता था?

आपने stress में मदद करने वाला कौन-सा कदम चुना, और उसे चुनने पर क्या बदला?